This article has been originally written in Hindi. English version has been attached along with it after the completion of the article. Image Source: Pinterest दशमभाव संबंधित कतिपय सूत्र: 1. विश्व के समस्त यशस्वी व्यक्तियों की कुण्डली में या तो दशम भाव में कोई ग्रह स्थित होता है अथवा दशमेश बलवान होता है। 2. दशम भाव आकाश का द्योतक माना गया है, अतः पदोन्नति, उन्नति तथा सफलता के लिए इसका विशेष महत्व है। यदि नवमेश, पंचमेश आदि शुभ ग्रह दशम भाव में स्थित हों, तो वे आर्थिक वृद्धि कराते हैं। 3. यदि दो राजपुत्रों की कुण्डलियाँ सामने हों और यह विचार करना हो कि कौन सिंहासन के योग्य है, तो निस्संदेह वही योग्य होगा जिसका दशम भाव और दशमेश बलवान हो। इससे दशम भाव का महत्व स्पष्ट होता है। 4. कुछ विद्वानों का मत है कि जिस कुण्डली में दशम भाव रिक्त हो, उसे देखना ही नहीं चाहिए। यद्यपि यह कथन विनोदार्थ है, तथापि इससे दशम भाव की महत्ता का ही प्रतिपादन होता है। 5. दशमेश यदि पंचमेश या नवमेश के साथ युक्त होकर दशम भाव में स्थित हो, तो समस्त कार्य सिद्ध होते हैं और ऐसा जातक राजपद प्राप्त करता है। 6. दशम भाव में ...
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